हैलो
दोस्तों मेरा नाम आर्यन है और मैं 18 साल का हूं और मेरी ये कहानी लगभग 8 साल
पहले की है। जैसा कि हमें पता है छोटी उम्र में हम सब क्यूट ही दिखते हैं। मैं भी
कुछ वैसा ही था। हमारे पड़ौस में ही हिना (बदला हुआ नाम) नाम की एक लड़की रहती थी।
उस समय वह 17 साल की रही होगी। काले लम्बे बाल, रंग एकदम
गोरा मानो रोज दूध से नहाती हो, पतली सी
लचकती कमर, गोल गोल चूचियां,
और उस पर मटकते चूतड़ तो गज़ब ही ढाते थे। उस समय मैं सैक्स
वगैरह के बारे में कुछ भी नहीं जानता था। ये भी नहीं समझता था कि मेरी नुन्नी
मुतने के अलावा भी कुछ कर सकती है।
मेरा
हिना के घर में आना जाना लगा रहता था। हमारे घर के पास में एक अण्डर कन्स्ट्रक्शन
मकान था। एक रविवार की सुबह मैं वहीं बाहर खेल रहा था कि हिना का वहां से गुजरना
हुआ। काले टॉप और सफेद स्कर्ट में वह मस्त दिख रही थी। उसने मुझे अपने पास
बुलाया और पूछा "तुम अकेले अकेले क्यों खेल रहे हो?
साथ में कोई दोस्त नहीं है क्या?"
मैंने ना में सिर हिला दिया। उसने मुझसे कहा "चलो मैं
तुम्हारे साथ खेलती हूं।" मैंने पूछा "हम क्या खेलेंगे?"
तो उसने कहा "हम दोनों डॉक्टर डॉक्टर खेलते हैं।"
मैंने
सोचा ठीक ही है आज साथ में कोई दोस्त नहीं है तो मेरा भी टाइम पास हो जाएगा। फिर
मैंने हिना से कहा "चलो हम मेरे घर चलते है।" तो हिना ने कहा "अगर
हम तुम्हारे घर पर खेलेंगे तो तुम्हारी मम्मी गुस्सा करेंगी।" मैंने भी
सोचा मम्मी मेरे दोस्तों पर अक्सर नाराज हो जाती है जब हम घर में खेलते हैं।
फिर मैंने कहा "तुम ही कोई जगह बता दो।" उसने कहा "सामने वाले मकान
में चलते है अभी तक तो वहां पर काम करने वाले लोग भी नहीं आए है तो हमें कोई नहीं
रोकेगा।"
हम
दोनों उस सुनसान मकान में पहुंचे और एक कमरे के अन्दर चले गए। हिना ने कहा
"तुम ऐसा करो तुम डॉक्टर बन जाओ और मैं तुम्हारी मरीज बन जाती हुं।"
ऐसा कहकर उसने मुझे एक स्टूल पर बिठा दिया और मेरे सामने एक टेबल पर खुद लेट गई।
मैंने पहले भी डॉक्टर डॉक्टर तो खेला ही था, इसलिए
जानता था कि इस खेल में क्या करना होता है। मैंने कहा "मुझे अपना स्टेथस्कोप
(खिलौने वाला) तो लाना ही पड़ेगा।" उसने मेरा हाथ पकड़ा और बोली "नहीं
नहीं उसकी जरूरत नहीं है, हम उसके
बिना ही खेल लेंगे। तुम स्टेथस्कोप की जगह अपना हाथ काम में ले लेना।"
खेल
शुरू हुआ, मैंने उससे पूछा "बताओ क्या
बीमारी है?" उसने कहा "डॉक्टर अब मैं आपको
क्या बताउं, मेरी छाती में बहुत दर्द रहता
है।" जैसा कि हिना ने मुझसे कहा था मैंने अपना हाथ उसके सीने पर रख दिया,
मुझे हाथ पर उसकी तेज धड़कन महसूस हो रही थी और दूसरा हाथ कान
पर लगाकर सुनने की कोशिश करने लगा। मैंने पूछा "क्या यहां पर दर्द होता है?"
उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी एक चूची पर लगाते हुए बोली
"यहां बहुत दर्द रहता है। जब दबाती हूं तो जोर से दर्द होता है।" मैंने
उसकी चूची को दबाया तो उसने आह भरी। मैंने कहा "वाकई दर्द तो हो रहा है। कब
से है आपको ये दर्द?" उसने
बताया "तीन महीने हो गए।" मैंने कहा "आपने तो इलाज करवाने में बहुत
देर कर दी।" उसने कहा "पहले आपसे इलाज करवाने का मौका नहीं मिला था ना
इसलिए।"
उसने
कहा "आप हल्का हल्का दबा रहे हैं ना, उससे अभी
थोड़ा आराम मिल रहा है। मेरी मसाजकर दीजिए ना।" मैंने उसकी चूचियों को दबाना
शुरू किया तो वह धीमी धीमी सिसकारियां भरने लगी। मैंने सोचा शायद उसे दर्द हो रहा
होगा इसलिए मैं रूक गया। उसने कहा "रूक क्यों गए डॉक्टर?
मेरा दर्द अब कम हो रहा है।" मैंने फिर से उसकी दोनों
चूचियां जोर जोर से मसलनी शुरू कर दी, और वो
धीरे धीरे कराह रही थी। काफी देर तक मै उसकी चूचियां दबाता रहा और वो सिसकती रही।
रूककर उसने मुझे कहा "डॉक्टर मेरी चूचियों का टेस्ट भी अजीब सा आता
है।" मैंने पूछा "अजीब से आपका क्या मतलब है?"
तो उसने कहा "आप खुद ही चूस कर देख लीजिए ना।"
उसने
अपना टॉप उतार दिया। उसने नीचे ब्रा भी काले रंग की पहनी हुई थी। उसके गोरे बदन पर
काले रंग की ब्रा कैसी लग रही होगी आप भी कल्पना कर सकते है। उसके ठीक बाद उसने
अपनी ब्रा भी उतार दी। उसकी दोनों चूचियां फुदकते हुए बाहर आ गई। उसने मेरा सिर
पकड़ा और मेरा मुंह अपनी एक चूची के पास ले गई। पहले मैंने सिर्फ जीभ से चखा तो
उसने कहा "ऐसे नहीं, चूसकर
देखिये डॉक्टर।" मैंने चूसना शुरू कर दिया। वह फिर से आहें भरने लग गई।
मैंने उसके हाथ छुड़ाकर अपने मुंह में से चूची को बाहर निकाला और पूछा "कोई
यहां चूसता है तो भी दर्द होता है क्या?" उसने
कहा "नहीं आप चूस रहे हो ना तो दर्द ठीक हो रहा है।" मैं फिर से चूसने
लग गया। लगभग 10 मिनट तक उसने बारी-बारी मुझसे अपनी दोनों चूचियां चुसवाई।
"आप
बहुत अच्छे डॉक्टर है।" उसने कहा "आप मुझे इन्जेक्सन भी लगा दीजिए
ना जिससे कि मेरा हर दर्द दूर हो जाए।" मैंने उसे उल्टा लेटने को कहा तो वो
उल्टा लेट गई। मैंने जैसा कि हमेशा से खेला था अपनी अंगुली से कपड़ों के उपर से
ही उसके चूतड़पर इन्जेक्सन लगाया। उसने कहा "डॉक्टर इस वाले इन्जेक्सन
का तो कोई असर ही नहीं हो रहा है।" फिर मैंने दूसरी अंगुली से इन्जेक्सन
लगा दिया पर इस बार भी उसका वही जवाब था। मैंने कहा "तो कौनसा इन्जेक्सन
काम करेगा।" "है ना एक और जो यहां पर है।" कहते हुए हिना ने मेरी
चड्डी पर हाथ रख दिया और नुन्नी को उपर से ही सहलाने लगी। हिना अचानक उठ खड़ी हुई
और मेरे होठों पर अपने होठ रख दिये। मैं जैसा कि अब तक खेल में कर रहा था उसके
होठों को भी चूसने लग गया। वह मुझसे बोली "अपनी जीभ को बाहर निकालो।"
मैंने वैसा ही किया तो वह धीरे से अपनी जीभ बाहर निकालकर मेरी जीभ के पास लाने
लगी। जब हम दोनों की जीभ आपस में टकराई तो मुझे भी पता नहीं क्यों एक अजीब सा अहसास
होने लगा, धड़कनें बढने लगी,
तेज तेज सांसे चलने लगी थी।
कुछ
ही पल बाद उसने मुझे टेबल पर खड़ा कर दिया और मेरी चड्डी को नीचे खिसका दिया। मेरी
छोटी सी नुन्नी उसके सामने थी जिसे देखकर वह पता नहीं क्यों मुस्कुराने लगी।
हिना स्टूल पर बैठ गई और मेरी नुन्नी चूसने लगी। मुझे अजीब सा मजा आने लगा और
मेरी नुन्नी फूलने लग गई। कुछ देर बाद मैंने कहा "पागल! इन्जेक्सन को ऐसे
मुंह में नहीं लगाते हैं।" "अरे हां मैं तो भूल ही गई थी।" ऐसा
कहते हुए उसने अपनी स्कर्ट और चड्डी नीचे खिसका दी। उसकी चूत पर कोमल बाल थे। मैंने
पूछा "तुम्हें यहां भी इतने बाल कैसे आते हैं?" उसने
कहा "प्लीज आप ये सब छोड़ो और जल्दी से अपना इन्जेक्सन लगा दो।"
वह
टेबल पर सीधे लेट गई और चूत की तरफ इसारा करते हुए बोली "डॉक्टर आप यहां पर
इन्जेक्सन लगा दीजिए।" मैंने कहा "इन्जेक्सन तो पीछे बम्स पर लगाते
है ना।" तो हिना हंसते हुए बोली "ये इन्जेक्सन इस छेद में ही लगता
है।" मैंने अपनी नुन्नी को पकड़ा और उसकी चूत के पास ले गया। जैसे ही मेरी
नुन्नी ने उसकी चूत को छुआ तो मुझे अपनी नुन्नी में एक अजीब सा अहसास हुआ। खैर
मैंने अपनी चार इंच की नुन्नी उसकी चूत में घुसाने की कोशिश की तो वह बाहर ही
फिसल गई। हिना ने मेरी नुन्नी को पकड़ा और अपनी चूत के पास टिका दिया और बोली
"अबकी बार ध्यान से अन्दर डालो।" मैं ऐसा करने ही वाला था कि अचानक
हमें बाहर की तरफ से कुछ आवाजें सुनाई दी, शायद काम
करने वाले मजदूर आ गए थे, और बाहर
बैठकर बातें कर रहे थे।
यह
सुनकर हिना ने हड़बड़ाहट में अपनी चड्डी और स्कर्ट उपर खींची फिर ब्रा और टॉप पहन
लिया। मेरी चड्डी को भी जल्दी से उपर खींचते हुए बोली "चलो आज इतना ही
खेलेंगे।" मैंने कहा "ये काम करने वाले लोग मुझे और मेरे दोस्तों को भी
डांटते है।" तो हिना बोली "अगर हमें देख लिया तो हमें भी
डांटेंगे।" मैंने कहा "आंगन में एक खिड़की है। हम हमेशा वहां से कूद
जाते हैं।" हिना बोली "चलो मैं भी वहीं से कूदती हूं तुम्हारे
साथ।" खिड़की से कूदकर हम दोनों थोड़ा दूर आए तो उसने कहा "आज तो शामत आ
जाती। चलो मुझे भी काम है, मैं जाती
हूं हम बाद में कभी ये खेल खेल लेंगे।"
अगली
बार हम कब खेले ये मैं आपको जरूर बताउंगा लेकिन फिर कभी। तब तक के लिए लड़के
हिलाते रहें और लड़कियां दबाती रहें और पढना ना भूलें नॉन वेज ढाबा।
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